Saturday, September 24, 2011

बीते हुए कुछ लम्हें, बीती हुई बातें ...

बीते हुए कुछ लम्हें, बीती हुई बातें
जो जगकर काटी हमनें ,कुछ वो तन्हा रातें
याद हमें फिर याद ,आज वो याद बहुत आयीं हैं ,
कभी जगी मुस्कान ,कभी तो आँखें भर आयी हैं ..

भूल कहाँ पाएंगे हम, वो बैठ सीढ़ियों पर गाना
वो क्लास बंक कर बेमतलब, सड़कों पर फिरते जाना
वो हॉस्टल के लगते चक्कर, आहें, और उनका इतराना
और घाट किनारे की बैठक,लड़ना,औ फिर हँसते जाना .

मांग लिए कभी धरने पर बैठे, कभी रूठें और मनें
लौटे मस्ती के ढर्रे पर, हम घिसने को थे नहीं बने
हर ख़ुशी पे हमने पार्टी की, हर दुःख में भी गाने गाये
कैसे भूलें उन लातों को जो बर्थडे पर हमने खाए

कॉलेज की कड़ियों पर बैठे, ragging  दी, ragging ली हमने
हर आती-जाती परियों को हंस-हंस कर लाइन दी हमने
उनके ख्यालों में भूल गये ,कब दिन बीता कब रात गयीं
सचमुच यारों कितनी यादें ,उन लम्हों के साथ गयीं ..

याद हमें फिर आज याद वो याद बहुत आयी हैं
कभी जगी मुस्कान ,कभी तो आँखें भर आयी हैं ...

Sunday, September 4, 2011

छात्रावास भोजनालय में फ्रेशर्स के लिए कुछ अलिखित नियम और सुझाव ...

IIT KGP के आम छात्रावास भोजनालय में फ्रेशर्स के लिए कुछ अलिखित नियम और सुझाव ...
१ ) नए और सफ़ेद कपडे पहन कर न जाएँ ,हो सकता है कोई नयूटन का गुरुत्व नियम आपके कपड़ों पर ही जांचना चाहे या किसी कुर्सी पर आपके कपड़ों के लिए नए पैटर्न या डिजायन छपे हों .
२) जिह्वा को कष्ट ना दें , रोटी रूपी च्वींगम से दांतों की भरसक कसरत के बाद सीधा ग्रासनली में धकेलने का महती प्रयास करें । रोजाना इस आसन को करने के बाद यदि उदर में गुड- गुड जैसा महसूस हो तो
a) dc ++ के सागर में गम भुलाने का जतन करें
b)साइकिल ले के वीराने में कॉलेज की चौहदी नाप सकते हैं,वैसे कॉलेज दिन में इसका पूरा ध्यान रखता है
c)भात खाना शुरू कर दें
d) बी सी राय में दिए गए पैसे को वसूलने का अच्छा मौका समझे और जंचवा लें
३) अपने सोये हुए पशु प्रेम को जगा लें , याद रखें "बिल्लियाँ और कुत्ते मनुष्य के अच्छे दोस्त होते हैं ",उनका नित्य और निकट दर्शन भोजन के पाचन के लिए अच्छा होता है *(* शर्तें लागु : कृपया गहराई में न जाएँ )
३)पूर्व में खाने मम्म कमी या बिल्लियों के आपसी छीन झपट में नाश्ते की प्लेट्स भी शायद चबाईं जाती रही होंगी , इसलिए उनके चपटे और कुबरेपन पर ध्यान न दें
४)खाने के बाद वाश बेसिन के पास अगल बगल से सधन्यवाद पीक प्रसाद और जल छितराव स्वीकार करें (याद रखें -क्रोध मनुष्य के लिए हानि कारक होता है , विशेष कर जब जल्दी में हों क्यूंकि आप हाथापाई करेंगे नहीं और वाक़ युद्ध में यहाँ सभी शेर हैं और इत्मिनान से हैं )




हम अजनबी जैसे रहे...

" वो तुम्हारी जिद थी या , तुमसे कोई वादा मेरा

मुद्दतों के बाद भी , हम अजनबी जैसे रहे

जब तुम्हारा जिक्र था ,मैंने कवायद खूब की

भूल ना पाया मगर की, हम कभी कैसे रहे "

फिर करता हूँ याद तुम्हें ...

फिर करता हूँ याद तुम्हें
वो छवि तुम्हारी मोहक सी
फिर, फिर करता हूँ याद प्रिये
वो खिली धुप सी मधुर हंसी

मेघ भरे नभ में द्युति सी
वो चमक उठी तेरी चंचलता
वो अदा तुम्हारी भेद भरी
अधरों की मादक कोमलता
फिर, फिर ..

मेरा नमन है ....

"चल रहे पथ से विलग जो,
जिनने राहें खुद बनायीं
जो परंपरागत ना हुए
सोच के उन प्रहरियों को
मेरा नमन है!"