बीते हुए कुछ लम्हें, बीती हुई बातें
जो जगकर काटी हमनें ,कुछ वो तन्हा रातें
याद हमें फिर याद ,आज वो याद बहुत आयीं हैं ,
कभी जगी मुस्कान ,कभी तो आँखें भर आयी हैं ..
भूल कहाँ पाएंगे हम, वो बैठ सीढ़ियों पर गाना
वो क्लास बंक कर बेमतलब, सड़कों पर फिरते जाना
वो हॉस्टल के लगते चक्कर, आहें, और उनका इतराना
और घाट किनारे की बैठक,लड़ना,औ फिर हँसते जाना .
मांग लिए कभी धरने पर बैठे, कभी रूठें और मनें
लौटे मस्ती के ढर्रे पर, हम घिसने को थे नहीं बने
हर ख़ुशी पे हमने पार्टी की, हर दुःख में भी गाने गाये
कैसे भूलें उन लातों को जो बर्थडे पर हमने खाए
कॉलेज की कड़ियों पर बैठे, ragging दी, ragging ली हमने
हर आती-जाती परियों को हंस-हंस कर लाइन दी हमने
उनके ख्यालों में भूल गये ,कब दिन बीता कब रात गयीं
सचमुच यारों कितनी यादें ,उन लम्हों के साथ गयीं ..
याद हमें फिर आज याद वो याद बहुत आयी हैं
कभी जगी मुस्कान ,कभी तो आँखें भर आयी हैं ...
जो जगकर काटी हमनें ,कुछ वो तन्हा रातें
याद हमें फिर याद ,आज वो याद बहुत आयीं हैं ,
कभी जगी मुस्कान ,कभी तो आँखें भर आयी हैं ..
भूल कहाँ पाएंगे हम, वो बैठ सीढ़ियों पर गाना
वो क्लास बंक कर बेमतलब, सड़कों पर फिरते जाना
वो हॉस्टल के लगते चक्कर, आहें, और उनका इतराना
और घाट किनारे की बैठक,लड़ना,औ फिर हँसते जाना .
मांग लिए कभी धरने पर बैठे, कभी रूठें और मनें
लौटे मस्ती के ढर्रे पर, हम घिसने को थे नहीं बने
हर ख़ुशी पे हमने पार्टी की, हर दुःख में भी गाने गाये
कैसे भूलें उन लातों को जो बर्थडे पर हमने खाए
कॉलेज की कड़ियों पर बैठे, ragging दी, ragging ली हमने
हर आती-जाती परियों को हंस-हंस कर लाइन दी हमने
उनके ख्यालों में भूल गये ,कब दिन बीता कब रात गयीं
सचमुच यारों कितनी यादें ,उन लम्हों के साथ गयीं ..
याद हमें फिर आज याद वो याद बहुत आयी हैं
कभी जगी मुस्कान ,कभी तो आँखें भर आयी हैं ...
