यूँ तो सिंगल रहने के बहुतेरे फायदे हैं ,मगर इस वसंतोत्सव २०१२ में कामदेव ने मानों अपने तरकश के सारे तीर मुझपर ही खाली कर दिए ,जब मोरनी तो छोडिये ,मुर्गियों को देख कर भी मेरा मन मयूर नाचने लगा . एकबारगी परिसर हरा भरा लगने लगा । आज तक का जीवन निरर्थक जान पड़ा और अप्सराओं को सोच कर इन्द्र देव पे गुस्सा भी आया ,
"खुद भी रखा ,सबको बांटा
मैंने माँगा, तो क्यूँ डांटा ?
घोर अँधेरा भया जगत में ,
किसी को दो-दो ,किसी को छांटा"
विद्रोही मन (हवसी न समझें ),इस अन्याय को दूर करने के लिए कृतसंकल्प हो जुट गया । इस kgp के मरुस्थल में लुप्तप्राय लड़कियों के लिए यूँ ही मारामारी थी और उन्हें सीधे सरल मजाक तो समझ आते नहीं ,मैं कैसे समझ में आता, फिर भी सवेरे सैर को निकला ,मगर कोई मुझसे भी पहले उठ जाता था ,सो गुलाब तो मिले नहीं सिर्फ गेंदे को लाल रंग कर बांटे ...choclate जो गिफ्ट कीं ,उनके rapper जमा करता तो शायद दूसरा क़ुतुब मीनार बन जाता ,मगर बात नहीं बनी। सो मैंने नेट का सहारा लिया । प्रेम- शास्त्र के सारे पोथे पलट डाले ,लुव गुरुओं की सारी डेटिंग साईट खंगाल डाली ,घंटों बैठकर उन par registration किये ,नेट पर जो "get girls in 5 easy steps" होते थे ,दरअसल वो स्टेप्स अगर सीधे चलो तो कितनी दफा एवेरेस्ट चढ़ -उतर जा सकते हो. रोज हजारों निवेदन भेजता,facebook पर face को book करने का संग्राम पुरे जोश-खरोश से चला.कितनी बार तो हॉट एंड सेक्सी या किसी लड़की का नाम मेरे updates में publish हो गये जबकि उन्हें सर्च बॉक्स में टाइप करना था । हफ़्तों कंप्यूटर की खिड़की इस उम्मीद से निहारता कि कहीं से कोई किरण या रेखा या सिर्फ बिंदु ही मेरे बियावान दिल में उजाला कर दे ,मगर कोई श्याम छिद्र (black hole) था जो हर कुछ हजम कर जाता रहा .कुछ मित्र निवेदन स्वीकृत हुए मगर बाद में पता चला कि वो मेरे ही कुछ अजीज दोस्तों की fake प्रोफाइल थी . ,प्राइवेट कॉलेज के मित्रों ने तफरीह ली मगर उन्हें कौन समझाए कि
दुनिया के मुकद्दर की हर लकीर जिसकी मेहमान है
"खुद भी रखा ,सबको बांटा
मैंने माँगा, तो क्यूँ डांटा ?
घोर अँधेरा भया जगत में ,
किसी को दो-दो ,किसी को छांटा"
विद्रोही मन (हवसी न समझें ),इस अन्याय को दूर करने के लिए कृतसंकल्प हो जुट गया । इस kgp के मरुस्थल में लुप्तप्राय लड़कियों के लिए यूँ ही मारामारी थी और उन्हें सीधे सरल मजाक तो समझ आते नहीं ,मैं कैसे समझ में आता, फिर भी सवेरे सैर को निकला ,मगर कोई मुझसे भी पहले उठ जाता था ,सो गुलाब तो मिले नहीं सिर्फ गेंदे को लाल रंग कर बांटे ...choclate जो गिफ्ट कीं ,उनके rapper जमा करता तो शायद दूसरा क़ुतुब मीनार बन जाता ,मगर बात नहीं बनी। सो मैंने नेट का सहारा लिया । प्रेम- शास्त्र के सारे पोथे पलट डाले ,लुव गुरुओं की सारी डेटिंग साईट खंगाल डाली ,घंटों बैठकर उन par registration किये ,नेट पर जो "get girls in 5 easy steps" होते थे ,दरअसल वो स्टेप्स अगर सीधे चलो तो कितनी दफा एवेरेस्ट चढ़ -उतर जा सकते हो. रोज हजारों निवेदन भेजता,facebook पर face को book करने का संग्राम पुरे जोश-खरोश से चला.कितनी बार तो हॉट एंड सेक्सी या किसी लड़की का नाम मेरे updates में publish हो गये जबकि उन्हें सर्च बॉक्स में टाइप करना था । हफ़्तों कंप्यूटर की खिड़की इस उम्मीद से निहारता कि कहीं से कोई किरण या रेखा या सिर्फ बिंदु ही मेरे बियावान दिल में उजाला कर दे ,मगर कोई श्याम छिद्र (black hole) था जो हर कुछ हजम कर जाता रहा .कुछ मित्र निवेदन स्वीकृत हुए मगर बाद में पता चला कि वो मेरे ही कुछ अजीज दोस्तों की fake प्रोफाइल थी . ,प्राइवेट कॉलेज के मित्रों ने तफरीह ली मगर उन्हें कौन समझाए कि
दुनिया के मुकद्दर की हर लकीर जिसकी मेहमान है
वो क्यूँ आजकल गाता-फिरता कान्हा के गुणगान है
तुम क्या जानो arts-economics-commerce पढने वालों रे
तेरी गली में जवाँ है शीला,यहाँ तो हर सड़क सुनसान है
हमने बड़े इत्मीनान से उनसे कहा...एक despo से "hello" की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू हर single की पहली उम्मीद होता है ये 'एक despo सा hello'....मगर सब बेनतीजा। आज फ्रुस्तापा की ये हालत है कि sine और cosine curve, कुछ और समझ आते हैं ,sec C के मायने बदल गये हैं ,१४ फ़रवरी technological frustapa day बन गया है ,जिसमें हम रूम में घुसे रहते हैं ताकि मिड्सेम के पढाई के बहाने अपनी व्यथा छुपा सकें ..
("आवाज़" के लिए लिखा गया एक भाट, सहयोग : श्री संगम तीर्थराज )
