Tuesday, September 1, 2009

टूट पड़ने तक !!

गहरी उदास साँझ के बाद ,
रात की श्याम स्याही ,
पिघलकर टपकती ,
ह्रदय में बूँद- बूँद लगातार
पहर ढलने तक
अबूझ तारों की पहेली
एक कठिन, अनसुलझा गणित ...
दूरियां पातीं विस्तार
फ़ैल जाता दुःख,
उलझ जाते जिंदगी के तार ,
टूट पड़ने तक !!

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