फिर करता हूँ याद तुम्हें
वो छवि तुम्हारी मोहक सी
फिर, फिर करता हूँ याद प्रिये
वो खिली धुप सी मधुर हंसी
मेघ भरे नभ में द्युति सी
वो चमक उठी तेरी चंचलता
वो अदा तुम्हारी भेद भरी
अधरों की मादक कोमलता
फिर, फिर ..
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Hi, brother
ReplyDeleteSayad ye wo anay nahi hai tu jisse hum jante the.....ye to masum sa kitabi kida...ha ha ha....thanks..dear accha likh rahe hlikhte raho...ha ha ha